Wednesday, April 1, 2015

 
निर्झरा सारखे व्हावे मी ही,
अवखळ अन् नितळ निर्मळ..।
वाहूनी जाव्या क्लेशभावना,
निरपेक्ष रहावे निरंतर अंतर..।।

रो..

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